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रविवार, 25 अगस्त 2019

स्वाभाविकता

मैंने गढ़ा नहीं कुछ भी
जो भी है सब स्वाभाविक है
रोटी को बेलती हूं चकले पर
कोशिश नहीं करती कि गोल ही बने
फुलाती हूं तो कभी-कभी नहीं भी फूलते
नरमाई कम हो जाती है
अरहर की दाल उलाती हूं
स्वाद के लिए, सौंधेपन के लिए
कभी-कभी जल भी जाती है
रसोई की व्यस्तता में
पर फेंकती नहीं मैं
घी का छौंका लगाती हूं जीरे के साथ
बैंगन-बड़ी की सब्जी बहुत पसंद है
पर अक्सर बैंगन में कीड़े निकल आते हैं
तो क्या? पूरा बैंगन नहीं फेंकती
कीड़े को फेंकती हूं पहले,  फिर सड़ चुके हिस्से को
सहेजती हूं दूध की मलाई
जो अब कम पड़ती है दूध में
दूध वाले भाई साहब पानी ज्यादा डाल देते हैं
मैंने कहा भी दिया है,  पानी ही डालें
फर्जी दूध का खेल स्वीकार्य नहीं होगा
मैं प्रेम के बदले प्रेम ही देती हूं
लेकिन पता नहीं क्यों
खो गयी मेरी स्वाभाविकता...

रजनीश आनंद

शनिवार, 29 अक्टूबर 2016

दीपावली की रात

जानते हो प्रिये तुम
दीपावली की रात
मैंने हर साल जलाये दीये
किंतु छटा नहीं वह तम
जिसने जकड़ रखा था
मुझे अपनी गिरफ्त में
मैंं दीये बढ़ाती गयी
लेकिन
कम ना हुई उसकी जकड़न
अंधेरे से डरती हूं मैं
मां यह बात जानती है
इसलिए मेरे साथ वो भी
लगातार चलाती रही दीये
लेकिन नहीं छटा अंधेरा
फिर एक दिन दो नन्हें हाथों ने
मेरे लिए जलाए दीये
उसकी दो चमकीली आंखें
किसी भी अंधेरे को चीर सकती थी
आसरा हो गया मुझे
उस अंधेरे से सामना करने का
पर अबकी दीवाली तो
मैंने अभी दीये भी नहीं जलाए
और रौशन है घर-आंगन
जानते हो क्यों?
क्योंकि
तुम्हारे प्रेम का दीया
मैंने जला रखा है मन में
अब नहीं लगता डर
मुझे किसी अंधेरे से
क्योंकि तुम हो साथ मेरे
रजनीश आनंद
29-10-16

दीपावली की रात

जानते हो प्रिये तुम
दीपावली की रात
मैंने हर साल जलाये दीये
किंतु छटा नहीं वह तम
जिसने जकड़ रखा था
मुझे अपनी गिरफ्त में
मैंं दीये बढ़ाती गयी
लेकिन
कम ना हुई उसकी जकड़न
अंधेरे से डरती हूं मैं
मां यह बात जानती है
इसलिए मेरे साथ वो भी
लगातार चलाती रही दीये
लेकिन नहीं छटा अंधेरा
फिर एक दिन दो नन्हें हाथों ने
मेरे लिए जलाए दीये
उसकी दो चमकीली आंखें
किसी भी अंधेरे को चीर सकती थी
आसरा हो गया मुझे
उस अंधेरे से सामना करने का
पर अबकी दीवाली तो
मैंने अभी दीये भी नहीं जलाए
और रौशन है घर-आंगन
जानते हो क्यों?
क्योंकि
तुम्हारे प्रेम का दीया
मैंने जला रखा है मन में
अब नहीं लगता डर
मुझे किसी अंधेरे से
क्योंकि तुम हो साथ मेरे
रजनीश आनंद
29-10-16