शनिवार, 30 अप्रैल 2016

क्या सच में नाराज हो प्रिये?

क्या सच में नाराज हो प्रिये?
मैं तो यूं ही कर थी ठिठोली तुमसे
ऐसे जो तुम रूठोगे, कैसे जी पाऊंगी मैं
माना मुझसे गलती हुई,  बाधा बनी मैं तुम्हारे कर्तव्यपथ में
लेकिन मंशा कहीं से भी नहीं थी तुम्हारा जी जलाने की
जो अग्रसर होगे तुम कर्तव्यपथ पर
हर्षित होगा मेरा तन-मन
नाराज हो गर तुम मुझसे, तो भी ये मेरा सौभाग्य
क्योंकि अपनों पर ही तो कोई हो ता है नाराज
कम से कम इतना तो हक तो है मुझे
कि तुम्हारी नाराजगी को ही समेट सकूं अपने आंचल में
लेकिन प्रिये ऐसा ना हो कि तुम बोलना ही बंद कर देना मुझसे
यह सह नहीं पाऊंगी मैं, चाहो, तो बोल लो कुछ भी मुझको
नहीं देना ऐसी सजा कि जीकर भी जी ना पाऊं मैं
बस इतना ही कह सकती हूं प्रिये
जो कुछ कहा वह मेरी नादानी थी
चाहती सिर्फ तुम्हारा प्रेम थी, कुछ भी करो
लेकिन मेरे प्रेम पर ना करना कभी संदेह
मर जाऊंगी मैं... मैं जाऊंगी मैं.
रजनीश आनंद
30-04-16

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2016

तुम इतने अच्छे क्यों हो प्रिये?

तुम इतने अच्छे क्यों हो प्रिये?
यह सवाल मेरे मन में हमेशा उठता है
ज्यों-ज्यों मैं तुम्हारी ओर खिंचती जाती हूं
और मनोहर होता जाता है तुम्हारा स्वरूप
जो तुम कहते हो, सच लगता है मुझे
जिसे देखो वो अनुपम
जिसे छू दो वह अमृततुल्य
तसवीर गूगल से साभार
लोग कहते हैं प्रेम इंसान की समझ को छोटा कर देता है
इसलिए मुझे नहीं दिखते तुम्हारे अवगुण
कोई यह भी कहता है, निर्मोही हो तुम
छोड़ जाओगे एक दिन रोता मुझे
लेकिन मैं इन सब से कहना चाहती हूं
तुम्हें दिखती होंगी लाख बुराइयां मेरे प्रिये में
लेकिन मुझे तो एक भी नहीं दिखतीं
आओ मेरी नजरों से देखो उसे
वह तुम्हें भी सोने जैसा खरा दिखेगा
मेरे मन में उसकी जो छवि है, वह मेरा भ्रम नहीं
मेरा विश्वास है, मैं जानती हूं मेरा प्रिये है अनमोल
उसके प्रेम में इतना रस है
जो उसे बनाता है मेरे लिए खास, सबसे खास...
जैसे मीरा को नहीं देखी अपने गिरिधर में कोई खामी
वैसे मुझे भी नहीं दिखता अपने सांवरे में कोई अवगुण
मेरे लिए तो वो है सर्वोत्तम, चाहे किसी के लिए हो ना हो.
रजनीश आनंद
29-04-16

गुरुवार, 28 अप्रैल 2016

आज प्रिये ने पूछा एक सवाल?

तसवीर गूगल से साभार
आज प्रिये ने पूछा एक सवाल
क्या बारिश पसंद है तुम्हें?
एक पल सकुचाई, समझ नहीं पायी,क्या दूं उत्तर
फिर मैंने कह दिया
किसे ना होगी बारिश पसंद
जिस बारिश के आने पर
नाच उठता है जंगल में मोर
अपने सुंदर पंख फैला मोर करता है मोरनी से प्रेम निवेदन
जो बारिश तपती धरती को तृप्त करती है
काले मेघ बन धरती के प्रियतम
देते हैं उसे सच्चा सुख
जिससे उर्वर हो धरा खिल उठती है
और अनुपम हो जाता है उसका सौंदर्य
चारों ओर हरियाली ही हरियाली
ऐसी बारिश किसे होगी नापसंद
मैं भी तो धरती की तरह
अपने प्रिये के लिए विरह आग में जलती हूं
कब मिलेगा मुझे प्रिये का प्रेम
ताकि धरती की तरह हो जाये मेरा भी सौंदर्य अनुपम
आज प्रिये तुमसे है मेरा एक सवाल
कब बन काले मेघ तुम बरसोगे, कब बरसोगे?
रजनीश आनंद
28-04-16

रविवार, 24 अप्रैल 2016

प्रिये क्या आज नहीं बोलोगे?

तसवीर गूगल से साभार
प्रिये क्या आज तुमने
ना बोलने की कसम खाई है
कब से मैं तुम्हारे सामने प्रेम निवेदन कर रही हूं
मीठी बातें कर रही  हूं लेकिन तुम चुप हो
आज तो सोचा था तुम्हारा सिर अपनी गोद में
रखकर तुम्हारे बालों को सहलाते हुए तुम संग बातें करूंगी
जब बढ़ेगी प्रेम की अधीरता तो समा जाऊंगी बाहों में तुम्हारे
ताकि एक हो जायें हम
लेकिन ना जाने क्यों आज तुमने ना बोलने की कसम खाई है
शायद तड़पाना चाहते हो मुझे
लेना चाहते हो मेरे धैर्य की परीक्षा
लेकिन जानते हो प्रिये
अधीर नहीं है मेरा प्रेम
तुम जीवन भर ना भी बोलो
तो भी कम ना होगा मेरा प्रेम
जब मीरा ने आजीवन किया एक बुत से प्रेम
तो क्या मैं नहीं कर सकती एक जीते जागते इंसान से प्रेम
बोलो ना प्रिये, एक बार तो बोल दो.
रजनीश आनंद
24-04-16

बुधवार, 20 अप्रैल 2016

किताब, मैं और प्रिये

हे भगवान, आज मुझे अपने सजीव होने पर दुख होता है
तुम तो कहते हो, मनुष्य योनि उत्कृष्ट है,फिर ऐसा कैसे हुआ?
मैं तुमसे जानना चाहती हूं, मुझसे अच्छी तो उस किताब की किस्मत कैसे?
जो हमेशा प्रिये के हाथों में होती है, उसके पन्नों को उलटते-पलटते
हमेशा उसे मेरे प्रिये का स्पर्श सुख नसीब होता है
वह हर वक्त उसे निहारता है
उसे सीने से लगाकर सो भी जाता है वो
उसपर भी उसका जी नहीं भरता, तो
जब वह साथ नहीं होती, तो उसकी चर्चाएं करता है
और मुझे देखो तुम, हमेशा प्रिये के साथ के लिए तरसती हूं
जब मैं कहती हूं ...क्या सुंदर नहीं मैं?
तो वो कहता है, तुम मुझे पसंद हो, अच्छी लगती हो
समझदार हो, इसलिए सुंदर भी लगती हो
फिर क्यों जब मैं पास जाना चाहती हूं, तो
वो कहता है अभी किताब है मेरे पास
हे भगवान, इंसान से अच्छी तो मैं किताब होती
हे प्रभु तुम्हारी माया क्या मुझे किताब बना सकती है?
लेकिन, भगवान इसमें उस बेचारी किताब का क्या दोष
मैं तो बेमतलब ही उसे भला-बुरा सुना रही हूं
ए किताब आ लग जा गले से मेरे
तू पहला प्यार है मेरे प्रियतम की
जब मिलेंगे तेरे मेरे अंग, तो शायद
तेरी खुशबू कुछ समा जाये, मेरे शरीर में
और इसी बहाने शायद मुझे मिल जाये मेरे प्रिये का साथ
और कुछ पल उसके वक्ष में मुंह छुपाकर, प्रेमरस में डूबकर बेसुध हो जाऊं मैं.

रजनीश आनंद
21-04-16

सोमवार, 18 अप्रैल 2016

ए सुनो ना प्रिये, जानते हो जब तुम्हारी आंखों में ...

तसवीर गूगल से साभार
ए सुनो ना प्रिये, जानते हो जब तुम्हारी आंखों में देखती हूं ना मैं
तो लजा कर कई बार ढंक लेती हूं अपना चेहरा हथेलियों के बीच
लगता है जैसे बस अभी तुम बाहों में भरकर चूम लोगे मुझे
और मैं घबरा कर भाग जाती हूं, लेकिन जब तुमसे दूर जाती हूं ना
तो तुम्हारा प्रेम बन कान्हा की बंसी मुझे अपनी ओर खिंचता है
कहता है क्यों चली आयी थी मैं तुम्हारी बांहों से निकल कर
क्यों नहीं मैंने जी लिया उन पलों को, जब तुम थे मेरे साथ
लाज तो बस विघ्न बन गया है मेरे और तुम्हारे मिलन के बीच
सोचती हूं क्यों मैंने चाहा था, स्याह अंधेरों के बीच तुमसे मिलना
क्यों तुम्हारी आंखों से घबरा गयी मैं, जबकि वही तो मुझे दिलाता है
तुम्हारे और मेरे प्रेम की पूर्णता का अहसास
काश कि मैं तुम्हारी आंखों में खो जाती और
जी लेती उन पलों को, जब तुम मुझे कराते मेरी संपूर्णता का अहसास
और थक कर सो जाती मैं तुम्हारी मजबूत बांहों के बीच बेसुध
और जब तुम मुझे जगाते और करते मुझसे प्रेम निवेदन
तो तुम्हारी आंखें मुझे बहुत भाती
सच कहती हूं तब मुझे मेरी दुनिया मिल जाती
ए सुनो ना प्रिये, जानते हो जब तुम्हारी ...
रजनीश आनंद
18-04-16

सोमवार, 11 अप्रैल 2016

जानते हो प्रिये...


तसवीर गूगल से साभार
जानते हो प्रिये, आजकल
अकेलापन नहीं सालता मुझे
सुबह से शाम तक उलझी रहती हूं
तुम्हारी यादों की लताओं में
कभी खुद से बोलती हूं
तो कभी हंस पड़ती हूं
कभी महसूस होता है
जैसे कस लिया है तुमने
बांहों के मजबूत घेरे में
तो कभी तुम्हारी नजरें
भेद जाती हैं तन-मन
जानती हूं, मैं कि तुम
नहीं हो पास मेरे,फिर भी
 ना जानें क्यों तुम्हारे होने का
एहसास हर पल है साथ मेरे
तुम्हारे होने की अनुभूति ही
जब दे जाती है, इतना सुख
तो कैसा होगा मिलन का मंजर
जानते हो प्रिये,
अब दुख नहीं है, गर ना हो
हमारा मिलन, क्योंकि मैं
बन चुकी हूं तुम्हारी मीरा
जिसे जीवनपर्यंत रहेगा
अपने कान्हा का इंतजार
जानते हो प्रिये....

रजनीश आनंद
11-04-16