बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

मेरी कमजोरी नहीं तुम...

मेरी कमजोरी नहीं तुम
कि
ना हो मिलन, तो टूट जाऊं मैं
तुम तो प्रेरणा हो
मेरे जीवन के
जो देता है मेरे जीवन को
नीले आकाश सा विस्तार
मिलन की आस तो
प्रेरित करती है मुझे
और मैं हर रोज
चुन लाती हूं मिलन की उम्मीद को
मानों चुन लाई मैं
हरसिंगार के फूल
खुद को सजा लेने को
इतनी गहराई है
प्रेम में तुम्हारे
कि
मैं जितना डूबती हूं
गहरा होता जाता है प्रेमरंग
क्षणिक आवेश या आकर्षण नहीं
तुम्हारे लिए प्रेम मेरा
इसमें तो ठहराव है
जीवन भर का...

रजनीश आनंद
01-02-17

शनिवार, 28 जनवरी 2017

आ जाओ एक बार कि...

आ जाओ एक बार
कि
कहना है कुछ मुझे
सीने से लगकर तुम्हारे
जीना है चंद पल मुझे
बिंदिया सजा मैं माथे पर
रचती हूं हर रोज सपना हसीन
कि
हौले से आकर तुम
चूम लेते हो पेशानी मेरी
आ जाओ अब तुम
कि
फीकी चाय भी मीठी लगने लगी
जिंदगी में इस कदर
सराबोर हो तुम
कि
सांसें तुम्हारे नाम पर चलने लगी
ख्वाहिश है, मैं टांक दूं 
तुम्हारी कमीज के कुछ टूटे बटन
और कुछ को छिपा लूं.
अब बेचैन है मन
कि
तुुम्हारे पीठ पर
लिखना है मुझे अपना नाम
भरना तुम्हें है बांहों में
जैसे तुम ना जाओ कभी
आ जाओ एक बार
कि ...

रजनीश आनंद
28-01-17

गुरुवार, 26 जनवरी 2017

...जो चेहरे पर दिखता है मेरे

तुम्हारे आगोश में जो सुकून है
वो चेहरे पर दिखता है मेरे
वैसे तो लिया नहीं नाम मैंने
तुम्हारा उस तरह कभी
फिर भी रह-रह कर
जिक्र आ ही जाता है तुम्हारा.
जो अनोखापन है हमारे प्रेम में
वो मोहताज नहीं किसी का
बस तुम मेरी दुनिया
और मैं तुम्हारी हूं
इस तरह जीयें कि
मेरे हिस्से की सांसें तुम भर लो
और तुम्हारी धड़कन
मेरे सीने में महसूस हो
कोई बुरी नजर नहीं
लील सकती हमारे प्रेम को
क्योंकि हम मजबूती के साथ खड़े हैं
हाथों में हाथ डाले...
रजनीश आनंद
26-01-17

बुधवार, 25 जनवरी 2017

...क्योंकि मुझे खुद से हो गया प्रेम है


सुबह -सुबह उठकर कभी महसूसा नहीं
ताजी हवा को, कि सोचा नहीं
इतना रोमांचित करती होगी सुबह
भागमभाग की जिंदगी
घर-आफिस-बच्चे
कहां वक्त, यह सोचने की
कि ताजी हवा गुदगुदाती भी है
मैं तो उलझी रही
झाड़ू-पोंछा, रोटी, प्रेशरकुकर और
रोज की ब्रेकिंग खबरों में
नाश्ते की भी फुरसत नहीं
गर्म दाल-रोटी को फूंक-फूंककर कभी खाती
कभी छोड़ भागती मैं
पर उस दिन, हां, मुझे अच्छी तरह याद है
जब तुम शामिल हुए मेरी दिनचर्या में
एक्ट्रावर्क की तरह नहीं,
स्पेशल असाइनमेंट बनकर
जिसने कराई मेरी खुद से पहचान
अब तो खुद से भी बातें कर लेती हूं
रातें अकेली नहीं होती, क्योंकि कागज पर तुम्हें उकेरती हूं
सुबह जब आंखें खोलती हूं, खुद से कह लेती हूं गुड मार्निंग
क्योंकि जब से तुम आये, मुझे खुद से हो गया प्रेम है...

रजनीश आनंद
25-01-17

मंगलवार, 24 जनवरी 2017

रातें खामोश नहीं होती, बोलती हैं...

रातें खामोश नहीं होती, बोलती हैं
अकसर जब बैठ कर अकेली
मैं इससे बातें करती हूं.
स्याह अंधेरा कहता है
खोल दो जुल्फों को अपनी
कि मैं इनमें उलझना चाहता हूं
लेकिन रूको, कुछ महसूस तो करो हिज्र को
देखो तो ये नीला आकाश
चांद के बिना भी सुंदर दिखता है
जिस रोज चांदनी आकाश की बांहों में होगी
वो रात तो सुकून देगी ही
तब तक तुम मेरे बांहों के घेरे को महसूस करो
और सो जाओ सुकून की नींद
क्योंकि रातें खामोश नहीं होती
वो बहुत कुछ कहती हैं
जरा सुनो तो, आंखें बंद करके...

रजनीश आनंद
25-01-16

क्या मैं अकेली थी?

क्या मैं अकेली थी?
नहीं तो भीड़ से घिरी थी,
बस उस भीड़ में कोई मेरा ना था
क्या मैं बहुत उदास थी?
नहीं तो मैं खिलखिला रही थी,
बस वो खुशी मेरी ना थी
क्या चांद चमकीला ना था?
नहीं तो चांद निहायत ही खूबसूरत था,
बस मुझे किसी का अक्स नजर नहीं आता था
अब अकेली तो हूं मैं,
पर भीड़ में कोई अपना सा
चेहरा नजर आता है
अब खिलखिला रही हूं मैं
क्योंकि तुम्हारी बातें गुदगुदा सी जाती हैं
और थिरक उठती है होंठों पर हंसी
चांद अब निहायत ही चमकीला हो गया है
क्योंकि जब भी उसकी ओर देखती हूं,
नजर आते हो तुम,
जो जकड़ना चाहता है मुझे प्रेमजाल में...

रजनीश आनंद
24-01-17

सोमवार, 23 जनवरी 2017

...और कसें हम-तुम

वसंत की दस्तक के साथ ही
इठलाती ठंड कुछ सहम सी गयी है
सर्द रातों में अलाव के सहारे
जीते लोगों ने ली है राहत की सांस
ऋतुराज के आगोश में
आम के पेड़ों पर महक उठी मंजरी है
बगिया में एक साथ खिल उठे कई फूल हैं
ऐसे खुशनुमा माहौल में मेरा मन आतुर है
तुम संग कुछ पल जीने को
जब हाथों में लेकर तुम्हारा हाथ
मैं कह सकूं, तुम साध्य मेरे जीवन के
हां, अब नहीं कोई चाह शेष है.
देखो ना वसंत को भी है ज्ञात
बात मेरे मन की, तभी तो
उसने हवाओं से कह दिया है
जो गुजरे मेरे नजदीक से
तो पहले कर आयें तुम्हारा स्पर्श
तुम्हारी खुशबू से सराबोर हूं मैं
इंतजार है मुझे उस पल का जब
वसंत के सानिध्य में
गूंजे हमारी खिलखिलाहट
और कसें हम-तुम
प्रेम आलिंगन में
क्योंकि मुझे तुमसे प्रेम है
अथाह प्रेम...बस प्रेम...
रजनीश आनंद
24-01-17